सादगी, स्वावलम्बन,आत्मविश्वास और रोजगार पर आधारित नए समाज की रचना के लिए प्रतिबद्ध

 एवं 

बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद से देश को मुक्त कराने के लिए संघर्षरत

आज़ादी बचाओ आन्दोलन

नया मुक्ति संग्राम

आजादी बचाओ आंदोलन की नींव

आजादी बचाओ आंदोलन की नींव 5 जून 1989 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी भवन में बुद्धिजीवियों, समाज कर्मियों और युवाओं द्वारा “संपूर्ण क्रांति दिवस” के उपलक्ष में आयोजित एक बैठक में पड़ी थी और “लोक स्वराज अभियान” नाम से 2 वर्ष आंदोलन चलता रहा और इसके मासिक पत्र “नई आजादी उद्घोष” का प्रकाशन भी आरंभ हो गया. इसका पहला सम्मेलन सेवाग्राम वर्धा में 7- 8 जनवरी 1991 को हुआ. जिसमें देश के बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों, पत्रकारों, समाजकर्मियों, गांधीवादी और समाजवादी चिंतकों ने भाग लिया. उस सम्मेलन में संगठन का नाम “आजादी बचाओ आंदोलन” तय हुआ और आंदोलन की दिशा तय करने के लिए एक सामूहिक घोषणा हुई जो सेवाग्राम घोषणा के नाम से प्रसिद्ध हुई.

JUNE 1974संपूर्ण क्रांति आंदोलन
DEC 1984“भोपाल गैस त्रासदी”
JUNE 1989-JAN 1991“लोक स्वराज अभियान” -“आजादी बचाओ आंदोलन”
1991-93विदेशी समझौतो को सीधी टककर

लाल किले पर एक और विशाल रैली

23 मार्च 1992 को आंदोलन ने दिल्ली के बोर्डर पर भूमंडलीकरण व उदारीकरण की नीतियों के खिलाफ विशाल रैली का आयोजन किया; 3 मार्च 1994 को अन्य जमीनी संगठनों के साथ मिलकर डंकल समझौते के विरुद्ध दिल्ली के लाल किले पर एक और विशाल रैली की। 14 दिसंबर 1993 को आंदोलन ने दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में बड़ी सभा की जिसमें राज्यसभा के विरोधी दलों के सांसदों और समाजकर्मियों ने ऐलान किया कि राज्यसभा में सभी पेटेंट कानून का संशोधन पारित होने नहीं देंगे। यह बिल चार साल तक रुका रहा। सरकार ने इस बिल को पारित करा लिया है पर आंदोलन ने अन्य संगठनों के साथ इसके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

अश्लील पोस्टर चिपकाने के खिलाफ आंदोलन की साढ़े तीन साल की कानूनी लड़ाई

कानूनी लड़ाई के बाद दिल्ली के पुलिस आयुक्त ने 7 जुलाई 1999 को आदेश जारी किया कि दिल्ली में कोई अश्लील पोस्टर चिपकाने नहीं दिया जाएगा। दूरदर्शन के खिलाफ आजादी बचाओ आंदोलन की याचिका पर 3 जुलाई 1996 को दिल्ली के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट श्री प्रेम कुमार ने आदेश जारी किया कि दूरदर्शन पर एडल्ट फिल्में तथा अश्लील कार्यक्रम बंद किए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। भारत सरकार ने आंदोलन के इस प्रयास को निष्फल कर दिया।

अमेरिकी नमक कंपनी करगिल को खदेड़ा

30 अप्रैल से 15 मई 1993 को आजादी बचाओ आंदोलन ने गांधीवादी और समाजवादी संगठनों के साथ मिलकर अमेरिकी कंपनी कारगिल के खिलाफ संघर्ष छेड़ा और जनदबाव के बल पर उसे कांडला (गुजरात) बंदरगाह से खदेड़ दिया।

राजस्थान के अलवर जिले में चौबीस देसी-विदेशी शराबखानों का लाइसेंस रद्द कराया। शंकरगढ़ इलाहाबाद में विदेशी पेट्रोल कंपनी शेल  को नहीं लगने दिया।

Scroll to Top